गुरुवार 19 फ़रवरी 2026 - 19:06
माहे रमज़ान, सुलूक ए इबादत की शुरुआत और फ़ितरत-ए-इलाही की तरफ़ रुजूअ का मौका है।हुज्जतुल इस्लाम मुहक़्क़िकी

हौज़ा / हुज्जतुल इस्लाम मुहक़्क़िकी ने कहा कि माह-ए-रमज़ान मुबारक इंसान के लिए फ़ितरत-ए-इलाही की तरफ़ लौटने, अपने नफ़्स का मुहासिबा करने और पूरे साल की बंदगी की बुनियाद रखने का बेहतरीन मौका है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,हुज्जतुल इस्लाम हुसैन मुहक़्क़िकी, ने कहा कि रमज़ान वह महीना है जिसे दीनी तालीमात में साल का सबसे अफ़ज़ल महीना बताया गया है। यही असल मायनों में इंसान की इबादती ज़िंदगी की शुरुआत है।

उन्होंने इमाम जफार अ.स.की एक रिवायत का हवाला देते हुए, नक़्ल किया है, कहा कि बड़े उलेमा के नज़दीक इबादती साल की शुरुआत रमज़ान से मानी जाती थी। इसलिए मोमिनों को चाहिए कि रमज़ान में दाख़िल होने से पहले, जैसे दुनियावी साल के आखिर में हिसाब करते हैं, वैसे ही अपने आमाल का हिसाब करें कहाँ फ़ायदा हुआ, कहाँ नुक़सान और पिछली कोताहियों की भरपाई की कोशिश करें।

इमाम ए जुमआ लालेजीन ने कहा कि अल्लाह की मदद और तौफ़ीक़ के बग़ैर इंसान रमज़ान से सही मायनों में फ़ायदा नहीं उठा सकता। अल्लाह पर भरोसा (तवक्कुल) ही इस रास्ते में कामयाबी की कुंजी है।

उन्होंने यह भी कहा कि मस्जिदें इस्लामी समाज की रूहानी, समाजी और साक़ाफ़ती ज़िंदगी का धड़कता हुआ दिल हैं। मस्जिदों से दूरी इख़्तियार करना समाजी बुराइयों के बढ़ने का सबब बन सकता है। आज ज़रूरत है कि हम अपने दिलों को साफ़ करें, मस्जिदों से रिश्ता मज़बूत करें और समाज के रूहानी व साक़ाफ़ती ज़ख्मों को भरने में अपना किरदार अदा करें।

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